पित्ताशय की पथरी और इसके उपचार में उपयोगी औषधीय प्रणालियाँ

सारांश
पित्ताशय का मुख्य कार्य यकृत द्वारा स्रावित पित्त को संगृहीतऔर केंद्रित करना है। पित्ताशय की पथरी एक प्रमुख स्वास्थ्य समस्या है, पित्त की पथरी मुख्यतः दो प्रकार की होती हैं: कोलेस्ट्रॉल पथरी और पिगमेंट पथरी। इसके प्रमुख कारणों में पित्त का रासायनिक असंतुलन, अत्यधिक कोलेस्ट्रॉल और बिलीरुबिन शामिल हैं। पित्ताशय की पथरी के लक्षणों में ऊपरी पेट में दर्द, उल्टी और अपच शामिल हैं। उपचार के लिए मुख्यतः तीन प्रणालियाँ (1. आयुर्वेदिक 2. एलोपैथिक 3. होम्योपैथिक) हैं। आयुर्वेदिक उपचार, जिसमें जड़ी-बूटियों और खान-पान में सुधार किया जाता है, जिसके लिए कई औषधीय पौधे जैसे एपियम ग्रेवियोलेंस, बौहिनिया क्यूमेनेंसिस, और कॉस्टस स्कैबर का उपयोग किया जाता है। भारत में औषधीय पौधों की प्रचुरता और उनका पारंपरिक चिकित्सा में उपयोग महत्वपूर्ण है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने 20,000 औषधीय पौधों की सूची में भारत का योगदान 15-20% बताया है। एलोपैथिक उपचार में दवाओं का उपयोग और पित्ताशय-उच्छेदन (कोलेसिस्टेक्टॉमी) शामिल है, जबकि होम्योपैथिक उपचार में पादप निर्मितपदार्थोंका उपयोग किया जाता है।

मुख्य शब्दः पित्ताशय, पथरी रोग, पित्ताशय की पथरी, आयुर्वेदिक, एलोपैथिक, होम्योपैथिक

परिचयः
पित्ताशय शरीर के दाईं ओर स्थित एक छोटी थैली है, जो यकृत के ठीक नीचे होती है और पित्त को संगृहीत करती है। पित्त जिसे पित्त रस भी कहा जाता है, यकृत द्वारा निर्मित एक हरा-भूरा तरल है। पित्त मुख्य रूप से वसा के पाचन को सुविधाजनक बनाने के लिए पित्त नलिकाओं के माध्यम से छोटी आंत में जाता है। पित्ताशय में कई बीमारियाँ होती हैं और उनमें से एक पित्त पथरी (कोलेलिथियसिस) प्रमुख है। [Gururaja et al., 2014]। पित्त की पथरी कुछ और नहीं बल्कि पित्ताशय में कोलेस्ट्रॉल और पित्त वर्णक का संग्रहणहै। पिछले कुछ वर्षों से गुर्दे और पित्ताशय की पथरी की बीमारी, एक विश्वव्यापी और बड़ी समस्या है। प्रकृति औषधीय पौधों की प्रचुर संपदा सेसंवर्द्धितहै। सदियों से पौधों का उपयोग पारंपरिक स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली के रूप में किया जाता रहा है। WHO ने वैश्विक स्तर पर 20,000 औषधीय पौधों को सूचीबद्ध किया है जिसमें भारत का योगदान 15-20% है [Shashi et al., 2013] IWHO ने बताया कि वैश्विक स्तर पर 80% देश औषधीय पौधों पर निर्भर हैं [Choubey et al., 2010]। वैश्विक स्तर पर 72000-77000 (विश्व वनस्पतियों का 17-18%) पौधे वर्तमान में औषधीय उद्देश्य के लिए उपयोग किए जाते हैं [Choubey et al., 2010]। भारत में, उच्च पौधों की 17,000 प्रजातियों में से 7500 औषधीय उपयोगों के लिए जानी जाती हैं [Kala et al., 2006]। पित्त पथरी के उपचार में उपयोग किए जाने वाले विभिन्न पौधे जैसे एपियम ग्रेवियोलेंस, बौहिनिया क्यूमेनेंसिस, बौहिनिया एक्साइज, कोस्टस स्कैबर, चामेसिस हिर्टा, सिसस वर्टिसिलाटा, कैप्रारिया बाईफ्लोरा, कॉकोस न्यूसिफेरा, एलुसीन इंडिका, फाइकस कैरिका, गोम्फ्रेना ग्लोबोसा, कैलंचोइ पिनाटा, पोर्तुलाका ओलेरैसिया, सोलनम मेलोंजेनाआदि हैं [Gururaja et al., 2014]

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